बच्चे को पॉटी ट्रेनिंग कैसे शुरू करे -कुछ जरूरी टिप्स

जब बच्चे साल या डेढ़ साल की उम्र के हो जाते है तो हर माँ को उसे पॉटी ट्रेनिंग देने की चिंता सताने लगती है ।हर माँ चाहती है कि अब उसका बच्चा सुसू और पॉटी जैसी चीज़ें खुद से बताना शुरू करदे तो उसके लिए बच्चे को इस बारे में समझाना जरूरी होता है । तो उसके लिए सबसे पहले आपको पॉटी ट्रेनिंग तब शुरू करनी है जब आपका बच्चा उठना -बैठना ,चलना शुरू करदे और वो बोल कर बता पाए । बच्चा कम से कम डेढ़ दो साल का हो जाये तो ही आप उसे अच्छे से यह सब सिखा पाएँगे और अगर कोई बच्चा थोड़ा देर से भी सीख जाये तो भी उसे ज़्यादा जोर नहीं देना चाहिए। नहीं तो बच्चा कई बार चिड़चिड़ा भी हो सकता है हर बच्चा धीरे धीरे यह बातें खुद से समझने लगता है ।

पॉटी ट्रेनिंग कैसे शुरू करवाए :

  • सबसे पहले आप बच्चे को पोट पर बिठाने का एक समय निश्चित करे । यह सुबह या दोपहर का भी हो सकता है अगर आपका बच्चा पोट पर नहीं बैठता तो आप उसे पॉटी चेयर भी ला कर दे सकते है और उसे कहे कि इसमें ही पॉटी करनी है ।
  • आप बच्चे को बताए कि अब डाएपर नहीं पहनना है और उसमें पॉटी भी नहीं करनी । उसके लिए वो पॉटी चेयर का इस्तेमाल करे ।
  • अगर उसे सुसु भी आए तब भी उसे उसी चेयर पर बैठने  को कहे ताकि उसे धीरे धीरे समझ आए कि मल त्याग करने की सही जगह कौन सी है ।
  • आप बच्चे के बड़े भाई या बहन से भी कह सकते है उन्हें यह सब समझाने के लिए ताकि छोटे बच्चे खेल खेल में यह बात समझ जाए ।
  • आप बच्चे की पॉटी चेयर फ्लश में थ्रो कर के उसके सामने फ्लश करे और शावर चलाये ताकि उसे समझ आ सके कि पॉटी कर के साफ भी यही करनी होती है 
  • ऐसा रोज़ करने से बच्चा धीरे धीरे समझ जाता है और करीब साल के बीच में ही वो खुद ही वाशरूम जाने लगता है ।
  • बच्चे को फिर यह भी सिखाये कि पैंट नीचे कैसे कर के सीट पर बैठना और कैसे खुद को साफ करना ।
  • बच्चों को बाद में हाथ धोने की आदत भी जरूर सिखाये और बिना हाथ धोये बाहर जाने से मना करे ।
  • बच्चे को यह छोटी छोटी आदतें ही धीरे धीरे अच्छी आदतों की तरफ ले जाती है ।
  • अगर कभी बच्चों को सिखाते समय वो कपड़ों में ही मल करदे तो बिल्कुल भी ग़ुस्सा न करे । बच्चों को शांति से समझाये और उन्हें साफ करदे ताकि वो चिड़चिड़ा महसूस न करे ।
  • पॉटी ट्रेनिंग करते समय बच्चों पर बिल्कुल भी दबाव न डाले और उन्हें बार बार ग़ुस्सा भी न करे क्योंकि कई बच्चों को सीखने में वक़्त भी लग सकता है ।
  • आप बच्चों की आदतों और तरीकों को समझते हुए उसी हिसाब से उन्हें समझाने का प्रयास करे  ।
  • आप बच्चे को बार-बार टॉयलेट जाने के बारे में पूछ सकते है ताकि जब भी उसे प्रेशर हो वो उसी वक़्त बता दे और बीच में न करे ।
  • बच्चे को साफ़ सफाई के बारे में भी बताते जाये ताकि उसे खुद को साफ़ रखने का महत्त्व समझ आ जाए ।
  • आप बच्चे को पॉटी करने बैठने के लिए पास में खुद बैठे और उसका ध्यान किसी और लगवाने की कोशिश करे जैसे उसे कोई कहानी सुनाए या बातों मे लगाए या बैठे बैठे कोई खेल के बारे में बताए ताकि उसका ध्यान मल से हट जाए और वो आसानी से मल त्याग कर सके ।
  • बच्चे को धीरे धीरे पॉटी चेयर पर बैठना सिखाना चाहिए और उसे वहाँ से पोट पर बैठने के लिए प्रेरित करते रहना चाहिए ।

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