आईयूआई ट्रीटमैंट,लक्षण और सफलता की दर

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आईयूआई धारण करना :

आईयूआई यानी इंट्रायूट्रीन इनसेमिनेशन ऐसी ही एक तकनीक है । यदि आपने भी गर्भधारण के लिए आईयूआई करवाया है तो इसके बाद का इंतजार बहुत लंबा लग सकता है । इस दौरान आपको चिंता भी हो सकती है ।

आईयूआई क्या होता है : 

यह विकल्प है, जिन्हें स्वाभाविक रूप से गर्भधारण करने में परेशानी होती है। इस प्रक्रिया में, फर्टिलाइजेशन की संभावना को बढ़ाने के लिए पुरुष के शुक्राणु को सीधे महिला के गर्भाशय में डाला जाता है। महिला के गर्भाशय में शुक्राणु को रखने के लिए एक कैथेटर का उपयोग किया जाता है। यह विधि कई मामलों में सफल रही है ।

आईयूआई-सफल या असफल :

आईयूआई  गर्भावस्था की सफलता महिला की उम्र , प्रजनन-संबंधी  गंभीर समस्याएं, प्रजनन दवाओं का उपयोग आदि शामिल हैं । इसलिए, सफलता की दर हर महिला में अलग होती है ।  

गर्भावस्था के लक्षणों का अनुभव :

कुछ महिलाओं को उपचार के बाद गर्भावस्था के शुरुआती संकेत या लक्षण दिखाई दे सकते हैं । यह दवाओं के सेवन के कारण होता है जिनमें प्रोजेस्टेरोन होता है, जिससे स्तनों में दर्द व सूजन, पेट में ब्लोटिंग और शरीर में थकान महसूस होती है । गर्भावस्था के वास्तविक लक्षण आमतौर पर दो सप्ताह के बाद दिखाई देते हैं ।

गर्भावस्था के लक्षण :

1. इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग :

इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग तब होती है जब अंडा गर्भाशय की अंदरूनी दीवार में खुद को चिपका लेता है, जिसके कारण योनि से थोड़ा डिस्चार्ज होता है  इसके साथ अक्सर ऐंठन हो सकती है । यह आमतौर पर गर्भधारण के 6 से 12 दिन बाद देखा जाता है ।

2. पीरियड में देरी :

पीरियड्स में देरी गर्भधारण की संभावना की ओर एक बड़ा संकेत होता है । जबकि बीच में स्पॉटिंग या हल्की ब्लीडिंग हो सकती है  यदि आपको ब्लीडिंग में कुछ असामान्य लगे तो आप डॉक्टर से परामर्श कर सकती हैं ।

3. स्तनों में दर्द :

यदि आप स्तनों में भारीपन, संवेदनशीलता और दर्द महसूस करें, तो यह आपकी गर्भावस्था का संकेत हो सकता है ।

4. मॉर्निंग सिकनेस :

गर्भावस्था के सामान्य लक्षणों में मतली या मॉर्निंग सिकनेस भी शामिल है।  ऐसा होने का कारण आपके शरीर में हार्मोन एस्ट्रोजन के स्तर में वृद्धि होती है।

5. थकान :

आपके शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के बढ़े हुए स्तर के कारण आपको इस दौरान बहुत थकान महसूस हो सकती है । इसके अलावा आपके ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर का स्तर भी कम हो जाता है ।

6. खाने की चीजों के प्रति लालसा और घृणा :

कुछ खाद्य पदार्थों के लिए आपको एक तीव्र और अजीब-सी लालसा उत्पन्न हो सकती है, जबकि इसी के साथ कुछ विशेष चीजों की गंध आप बर्दाश्त भी नहीं कर पाएंगी । यह गर्भावस्था का एक लक्षण होता है ।

7. शरीर का तापमान लगातार बढ़ा हुआ रहना :

प्रोजेस्टेरोन के स्तर में वृद्धि आपके शरीर के तापमान को बढ़ा सकती है । हार्मोन प्रोजेस्टेरोन के स्तर में वृद्धि आपके शरीर के तापमान को बढ़ा सकती है । ये एक ट्यूबल प्रेगनेंसी या इन्फेक्शन का संकेत हो सकते है ।

कब करना चाहिए प्रेग्नेंसी टेस्ट :

  • भले ही आईयूआई प्रक्रिया में शुक्राणु को सीधे गर्भाशय में प्रवेश कराया जाता है, लेकिन डिंब के निषेचन के बाद, जाइगोट को गर्भाशय तक पहुंचने में लगभग चार से छह दिन लगेंगे। 
  • इसके बाद इम्प्लांटेशन में और पाँच दिन या उससे भी अधिक समय लग सकता है ।
  • प्रेगनेंसी टेस्ट में गर्भावस्था की पुष्टि करने वाले हार्मोन एचसीजी का स्तर बढ़ने में थोड़ा और समय लगने की संभावना होती है ।
  • इसलिए, आईयूआई प्रक्रिया के कम से कम दो सप्ताह यानी 14 दिनों के बाद गर्भधारण की जांच करना बेहतर है । 
  • आईयूआई प्रक्रिया के बाद आपकी गर्भावस्था के बारे में पुष्टि की प्रतीक्षा का समय तनावपूर्ण और भावनात्मक हो सकता है। 
  • हालांकि, आपके लिए यह आवश्यक है कि आप शांत रहें । कम से कम दो सप्ताह के लिए होम प्रेगनेंसी टेस्ट करने से बचें ।

 

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