पित्ता दोष-कारण,प्रभाव और घरेलू उपाय

पित्त दोष यानि वो तत्व जो हमारे शरीर के हॉर्मोन्स और एन्ज़ाइम्स को नियंत्रित करता है । हमारे शरीर में पित्त का ठीक रहना बहुत महत्वपूर्ण है अगर किसी के पित्त में कोई परेशानी हो तो वो इंसान पेट की बीमारियाँ जैसे कबज ,अपच आदि से ग्रसित रहता है ।उसका शरीर ठीक से काम नहीं करता और उसका मन किसी भी कम में  नहीं लग पाता । इससे शरीर की पाचक अग्नि तक कमजोर होनी शुरू हो जाती है ऐसे व्यक्ति को जल्दी कुछ पच भी नहीं पाता ।
किन कारणों से पनपती है यह समस्या :

    • चटपटे खाने का ज़्यादा प्रयोग करना ,तीखा मसालेदार खाना आदि ।
    • शराब का अधिक सेवन करना ।
    • ज़्यादा गुस्से में और परेशान रहना ।
    • सही समय पर खाना न खाना या अधिक खा लेना ।
    • तिल का तेल ,दही सरसों साग आदि का सेवन करना ।
    • ज़्यादा छाछ या खट्टा  खाना ।
    • अलग -अलग तरह के मांस ज़्यादा खाना ।

इसके बढ़ जाने पर इसके लक्षण कुछ इस प्रकार है :

  • बहुत अधिक थकावट या नींद में कमी हो जानी ।
  • शरीर में तेज जलन ,गर्मी या पसीना आना ।
  • त्वचा का रंग गाढ़ा हो जाना ।
  • शरीर के अंगो से दुर्गन्ध आनी ।
  • मुँह और गला पक जाना ।
  • बेसुध और चककर आने ।
  • त्वचा ,मल मूत्र और आँखों का रंग पीला पड़ना ।
  • मुँह का कड़वा और बेस्वाद होना ।
  • ज़्यादा गुस्सा आना ।
  • ठंडी चीज़ें खाने से मना करना ।

कैसे ठीक करे इसे :

  • सबसे पहले तो आप सभी तरह की दालें खाये ।
  • आप हरी सब्जियाँ और फल जरूर खाये ।
  • आप अंकुरित चीज़ें जरूर ले ।
  • आप घी का सेवन जरुर करे ।
  • गोभी ,खीरा ,टमाटर ,आलू आदि का सेवन जरूर करे ।
  • ठंडे तेल से शरीर की मसाज करे ।
  • नियमित रूप से छाया में सैर करे ।
  • धूप से अपना बचाव रखे ।
  • आसन भी जरूर करे ।
  • खुद को शांत और प्रसन्न रखे तनावमुक्त रहे ।
  • ठंडे पानी से स्नान करे ।
  • तैराकी जरूर करे ।
  • तले और मसालेदार भोजन से बचे ।
  • रेड मीट भी न ले ।
  • ज़्यादा चाय कॉफी भी नुकसानदेह हो सकती है ।
  • कड़वी कसैली और मीठी चीजें खाए ।
  • आप शहद भी जरूर ले ।
  • सन्तुलित आहार ले ।
  • ज़्यादा आराम भी न करे और शारीरिक गतिविधियाँ भी ज़्यादा न करे ।
  • मक्खन भी फायदेमंद है ।
  • ज़्यादा नमक और मीठे से दूर रहे ।
  • अपना मन मैडिटेशन की तरफ लगाए ।
  • किसी के साथ बातें करे और खुश रहे ।
  • निकोटिन ,शराब आदि से दूर रहे ।
  • आप आयुर्वेद का इलाज भी करवा सकते है ।
  • सरसों का साग ,बैंगन, लहसुन नहीं खाने चाहिए ।
  • आप हल्दी भी न ले ।
  • खटटे अचार नहीं खाने चाहिए ।
  • आप ज़्यादा गर्मी में या फिर आग के पास न बैठे ।
  • आप छाछ और लस्सी का सेवन करे और उसमें अजवायन पीसकर डाले ।
  • आप किसी में भी डालकर काला नमक जरूर ले यह बहुत फायदेमंद होता है ।
  • आप गाय का शुद्ध घी खाये यह आपको बहुत फायदा करेगा
  • काला जीरा खाने से साँस फूलना ठीक रहता है ।
  • ज़्यादा आयोडिन युक्त नमक का उपयोग न करे ।
  • आप आँवला रात को भिगो दे सुबह उसे मसलकर छानकर पीले यह भी बहुत गुणकारी है ।

बिमारियाँ जो पित्त से उत्त्पन होती है :

  • बालों का बहुत झड़ना या जल्दी सफ़ेद हो जाना ।
  • हार्मोनल असंतुलन हो जाना ।
  • माइग्रेन ।
  • चिड़चिड़ापन या मूड सविन्ग्स होने ।
  • मतली होनी और चक्कर आने ।
  • खून के थकके जमने ।
  • मुहाँसे हो जाना ।
  • मुँह से बदबू आनी ।
  • माहवारी में ज़्यादा खून आना ।
  • आर्थोराइटस ।
  • पीलिया ।
  • एक्सिज़मा ।
  • सनबरन और सीने में जलन होनी ।
  • बुखार होना ।
  • अल्सर और दस्त लगना ।
  • ब्रेन स्ट्रोक ।
  • किडनी में संक्रमण ।
  • हाइपोठ्यरोडिस्म ।
  • कम नज़र आना ।
  • ऑटोइमयून विकार ।
  • डिप्रैशन हो जाना ।
  • सिर दर्द रहना और मन परेशान रहना ।
  • नींद में कमी आनी ।
  • अपने स्तनों या लिंग को छूने पर दर्द ।
  • गले में खराश रहना ।
  • ज़्यादा गर्मी लगनी ।
  • ज़्यादा भूख लगनी ।
  • शरीर पर संक्रमण होने ।
  • धैर्य कम होना ।
  • अस्थिरता आ जानी ।
  • पेप्टिक अल्सर हो जाना ।
  • कफ रहना ।
  • शरीर में अस्थिरता रहनी ।
  • भावनात्मक तनाव आना ।
  • शरीर का रंग गाढ़ा पड़ जाना ।

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