प्लेसेंटा प्रिविआ – उपचार ,लक्षण, खतरा और कारण

प्रत्येक प्रेग्नेंट महिला के गर्भ में  प्लेसेंटा महत्वपूर्ण अंग होता है। यह गर्भ में पल रहे भ्रूण के लिए रक्षा कवच की तरह काम करता है। इसका एक सिरा गर्भनाल से, तो दूसरा शिशु की नाभी से जुड़ा होता है। कई बार यह गर्भाशय के निचले हिस्से में होता है, जिस कारण गर्भवती को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस स्थिति को प्लेसेंटा प्रिविया या फिर लो-लाइंग प्लेसेंटा कहते हैं। 

प्लेसेंटा प्रिविया के प्रकार :

  • मार्जनल प्लेसेंटा प्रिविया : इसमें अपरा ग्रीवा के बिल्कुल किनारे पर होता है ।
  • पार्शियल प्लेसेंटा प्रिविया : इस स्थिति में अपरा ग्रीवा को हल्का-सा ढक लेता है ।
  • कंप्लीट प्लेसेंटा प्रिविया : ऐसा तब होता है, जब अपरा पूरी तरह से ग्रीवा के ऊपर आ जाता है ।

प्लेसेंटा प्रिविया के कारण :

  • अगर कभी गर्भाशय में ट्यूमर रहा हो।
  • गर्भवती महिला की उम्र 35 वर्ष या उससे ज्यादा हो।
  • गर्भ में जुड़वां या फिर उससे ज्यादा भ्रूण हों।
  • धूम्रपान, शराब व तंबाकू का सेवन करने की आदत हो।
  • अगर पहली गर्भावस्था में भी प्लेसेंटा प्रिविया की शिकायत रही हो।
  • अगर बीएमआई असंतुलित होता है, तो भी प्लेसेंटा प्रिविया की समस्या का सामना करना पड़ सकता है ।

प्लेसेंटा प्रिविया के लक्षण :

  • अगर लेबर पैन की तरह संकुचन लगातार यानी एक घंटे में 5 से 10 मिनट तक होते हैं, तो यह चिंता का विषय है। इस दौरान, पेट व कमर में दर्द हो सकता है ।
  • इनके अलावा, कुछ अन्य लक्षण भी हैं, जिनके बारे में सिर्फ अल्ट्रासाउंड के जरिए ही पता चल सकता है ।
  • जब अपरा पूरी तरह से ग्रीवा को कवर कर लेता है, तो ऐसे में या तो शिशु का सिर नीचे की तरफ नहीं आ पाता या फिर उसकी दिशा थोड़ी सी तिरछी हो जाती है ।

प्लेसेंटा प्रिविया का निदान : अगर किसी गर्भवती को प्लेसेंटा प्रिविया है, तो दूसरी तिमाही में होने वाले अल्ट्रासाउंड में डॉक्टरों को इसका पता चल जाता है । 

  • भ्रूण की दिशा पता लगाकर ।
  • कुछ मामलों में ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड किया जाता है ।

प्लेसेंटा प्रिविया का उपचार :

  • अगर रक्तस्राव कम हो रहा है, तो डॉक्टर घर में ही आराम करने की सलाह देते हैं और अगर ज्यादा हो रहा है, तो गर्भवती को अस्पताल में अपनी निगरानी में रखते हैं ।
  • इस दौरान, जरूरत पड़ने पर गर्भवती को रक्त चढ़ाया जा सकता है ।
  • जब डॉक्टरों को लगता है कि स्थिति सामान्य है, तो उसे घर भेज सकते हैं ।
  • गर्भावस्था को कितना समय हो गया है और गर्भ में भ्रूण की हालत कैसी है। साथ ही अपरा व भ्रूण किस जगह पर है ।
  • गर्भावस्था के 36 हफ्ते के बाद कंप्लीट प्लेसेंटा प्रिविया होने पर डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी की सलाह देते हैं, ताकि बच्चे व गर्भवती के जीवन को सुरक्षित किया जा सके ।
  • तीसरी तिमाही में भी प्लेसेंटा प्रिविया होने पर डॉक्टर गर्भवती महिला को पूरी तरह से बेड रेस्ट करने की सलाह दे सकते हैं। साथ ही यौन संबंध बनाने, व्यायाम करने व किसी अन्य तरह की शारीरिक गतिविधि को बंद करने के लिए कहते हैं।
  • अगर आप 36वें हफ्ते तक नहीं पहुंचे हो और रक्तस्राव अधिक हो रहा है, तो डॉक्टर कॉर्टिकोस्टेरॉयड दवा दे सकते हैं । 

प्लेसेंटा प्रिविया की जटिलताएं :

  • अधिक मात्रा में रक्तस्राव हो सकता है ।
  • पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने से भ्रूण की हालत बिगड़ सकती है ।
  • समय से पूर्व यानी 37वें हफ्ते में ही डिलीवरी हो सकती है ।
  • बच्चे में कुछ विकार उत्पन्न हो सकते हैं ।
  • गर्भ में बच्चे का विकास रुक सकता है ।
  • भ्रूण की सेहत खतरे में पड़ सकती है ।
  • हालत बिगड़ने पर ऑपरेशन करना पड़ सकता है ।
  • सर्जरी के जरिए गर्भाशय को निकालने तक की नौबत आ सकती है ।

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