प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाये और मॉर्निंग सिकनेस से बचने के उपाय

pregnancy ke time kya kahaye

हर गर्भवती महिला अपनी पहली प्रेगनेंसी के दौरान काफी सवालो का सामना करना पड़ता है जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाये और मॉर्निंग सिकनेस से कैसे बचे प्रेगनेंसी के दौरान। अमूमन हर महिला गर्भवस्था के दौरान काफी शारीरिक बदलाव से हो कर गुजरती है। इस पोस्ट में हम आपके इन्ही सवालो का जवाब दिया है।

शरीर में होने वाले बदलाव और उन बदलावों से निपटने के उपाय :-

  • हरी पत्तेदार सब्जियाँ  खाना बहुत जरूरी है क्योंकि यह बच्चे को जन्म से जुडी कुछ परेशानियों से बचाता है |
  • कैल्शियम से जुड़ी चीज़ें जैसे  दूध, दही, पनीर आदि खाना बहुत जरूरी है ।
  • शुरुआती दिनों में ज़्यादा गर्म  चीज़ों से परहेज रखना चाहिये ।
  • अखरोट बच्चे के दिमाग़ के विकास के लिये  बेहद जरूरी है  तो उसे भी अपनी खुराक में जरूर शामिल करना चाहिये ।
  • प्रोटीन की मात्रा को पूरा करने के लिए हमे अंडे और मछली  पर जरूर ध्यान देना चाहिये |
  • इस अवस्था में शरीर को  पानी की कमी न होने देना बेहद जरूरी है |
  • तैल्य पदार्थों से परहेज रखना चाहिये ।
  • खाना हमेशा शुद्ध और साफ़ खाना चाहिये।
  • भारी वस्तुओं को उठाना नहीं चाहिये ।
  • इस वक़्त  खुश रहना चाहिये और जितना हो सके ज्यादा सोचकर परेशान नहीं होना चाहिए ।
  • ऊपर दिए गए इन उपायों के इलावा एक औरत को गर्भावस्था में महसूस होने वाली मॉर्निंग सिकनेस से निपटने के लिए विटामिन बी लेने की आवश्यकता होती है।
  • आपको कैफीन युक्त चीज़ों का सेवन कम करना है । 
  • आयरन समृद्ध खाद्य पदार्थों  का सेवन जरूर करना चाहिए

हर औरत को गर्भावस्था के दौरान अनेको शारीरिक बदलावों से गुजरना होता है तो आईए जानते है कि हमें क्या करना और क्या नहीं करना चाहिये :-

  • सबसे पहले तो पानी अधिक पिए और वो चीज़ें जो डॉक्टर ने खाने से मना की हो बिलकुल भी न खाये | 
  • हल्का व्यायाम करें ताकि आपको  कोई परेशानी न हों | 
  • भारी चीजें न उठाए | 
  • जितना  हो सके मन प्रसन रखें ।
  • आपको सामान्य  से अधिक थकान हो सकती है इसलिये शाम को कुछ देर आराम जरूर करे । 
  • धूम्रपान और शराब का प्रयोग न करें । 
  • प्रदूषण से बचे |
  • डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवाई न खाएं ।
  • पेट के बल न सोये । 
  • अधिक देर तक खड़ी न रहे |
  • वजन कम करने की कोशिश न करे |
  •  ज़्यादा उछल कूद न करें | 
  • बार बार सीढिया उतरने – चढ़ने की कोशिश न करें ।

प्रेग्नेंसी के पहले महीने में शरीर में होने वाले बदलाव कुछ इस तरह है :-

  1. गर्भवती महिला को अपना शरीर पहले से ज़्यादा फूला हुआ लग सकता है और उसे अपनी पीठ का हिस्सा थोड़ा तंग महसूस हो सकता है।
  2. गर्भवती महिला की योनि से अधिक स्राव हो सकता है।
  3. स्तन ग्रंथियों में वृद्धि होने के कारण गर्भवती महिला के स्तन का आकार बढ़ सकता है ।
  4. अंडोत्सर्जन (ovulation) के एक सप्ताह या दस दिन के बाद तक गर्भवती महिला को स्पॉटिंग हो सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले पिता की जिम्मेदारी :-

  • सभी कागज़ी काम खुद करें ।
  • प्रेग्नेंसी के बारे में पढ़ें ।
  • संयम बरतें ।
  • खुश रखें ।
  • खान-पान का ध्यान रखें ।
  • भारी वस्तु न उठाने दें । 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:-

क्या गर्भावस्था के पहले महीने में पेट के निचले हिस्से में दर्द होता है ?

हां, गर्भावस्था के पहले महीने में पेट के निचले हिस्से में दर्द हो सकता है। यह दर्द  गर्भ में भ्रूण के प्रत्यारोपित होने की वजह से होता है। आमतौर पर एक से दो दिन में यह दर्द चला जाता है 

प्रेग्नेंसी की शुरुआत में रक्तस्राव का क्या मतलब हो सकता है?

प्रेग्नेंसी के पहले महीने में गर्भ में भ्रूण के प्रत्यारोपण के कारण रक्तस्राव हो सकता है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top