बच्चे को बोलना कैसे सिखाएँ-कुछ जरूरी टिपस

हर बच्चा तीन साल की उम्र तक बोलना शुरू कर देता है पर वैसे जब बच्चा आठ महीने का हो जाता तब वो थोड़ा इशारों में और फिर धीरे-धीरे एक-एक शब्द बोलना शुरू कर देता है । ऐसा करते करते तीन साल की उम्र तक बच्चा काफी साफ शब्द और पूरी लाइन तक बोलना शुरू कर देता है । पर कई बच्चे ऐसे होते है जो इस उम्र तक ठीक से नहीं बोल पाते या बोलना शुरू नहीं करते । उन बच्चों के माँ-बाप के लिए यह एक परेशानी का सबब है ।

अगर आपका बच्चा एक-दो शब्द ही बोल रहा है या उससे ज़्यादा बोल नहीं पाता है तो उसे बोलना कैसे सिखाएँ :

  • सबसे पहले तो आप को अपने बच्चे को अच्छे से वक़्त देना होगा । उसके साथ बैठ कर बातें करे । उसे भी बोलने का मौका दे । उसे कोई न कोई खेल में लगाए ताकि वो उसमें अपनी रूचि जताते हुए बोलने की कोशिश करे ।
  • आप बच्चे को कोई न कोई कहानी सुनाने की कोशिश करे ताकि उसे आपकी बातों में रूचि जागृत हो और वो आपके साथ घुलने-मिलने की कोशिश करे । 
  • अपने बच्चे को और बच्चों के साथ खेलने के लिए बिठाये ताकि उनकी देखा -देखी वो भी बोलने की कोशिश करे ।
  • बच्चे को घर के और लोग भी बातों में लगाए ताकि उसे जिसके साथ अच्छा लगे उसके साथ वो कोई न कोई शब्द जरूर बोले ।
  • आप बच्चे को कोई गेम में भी लगा सकती है ताकि उसमें उसे अच्छा लगे ।
  • आप बच्चे को कोई लोरी या पोइम भी सुना सकती है । इससे बच्चे के अंदर खेल-खेल में सीखने की रुचि भी जागेगी ।
  • अगर यह सब लगातार करने के बाद भी आपके बच्चे में कोई सुधार न लगे तो आपको यह देखना चाहिए कि बच्चे की सुनने-समझने की शक्ति ठीक हो या इसके मुँह या जीभ में कोई दिक्कत न हो । ऐसा कुछ भी होने पर आपको बच्चे के ३ साल के ऊपर हो जाने पर पैडेटरीशन से जरूर सलाह लेनी चाहिए ।

स्पीच लैंग्वेज थैरेपी :

  • यह थैरेपी बच्चों की बोलने की क्षमता को बढ़ाने के लिए मदददगार होती है । इस थैरेपी के बाद बच्चों में आत्मविश्वास आता है और वो धीरे-धीरे साफ बोलने लग जाते है ।
  • बच्चों को स्पीच थैरेपी में कुछ एक्टिविटीज जैसे टंग ट्विस्टर्स , फ़्लैश कार्ड्स का उपयोग और आईने में देखकर अभ्यास करना आदि चीज़ें करवाई जाती है । जिससे बच्चे की ज़ुबान साफ़ हो जाती है और वो शब्द जोड़ कर बोलने लग जाते है ।
  • स्पीच थैरेपी में कुछ आत्मविश्वास से भरने वाली एक्टिविटीज भी होती है और कुछ मुँह की एक्सरसाइज भी जो बच्चे की बोलने की क्षमता को मजबूत करती है ।
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