गर्भावस्था के शुरुआती 3 महीनों के दौरान क्या – क्या सावधानियां बरते

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कहते हैं  कि गर्भावस्था का  समय सबसे अहम समय होता है । पहले तीन महीनों का समय वह समय है जब मिसकैरिज की आशंका बहुत ज़्यादा बढ़ जाती है । इसलिए इस समय को नाज़ुक समय भी कहते है । ऐसा माना जाता है कि गर्भवती को पहले तीन महीनों में भीड़ -भाड़ वाली जगहों से बचना चाहिए । शुरुआती दिनों में जितना हो सके प्रोटीन ,कैल्शियम लेना चाहिए । गरम चीज़ों से परहेज करना चाहिए  । 

तो आईये जानते है क्या खाये और क्या न खाये इन दिनों में :

क्या खाये :

    • गर्भवती को अपने खाने में दूध ,दही और पनीर जरूर शामिल करना चाहिए ।
    • ये शुरुआती दिनों में बच्चे की ग्रोथ होने में मददगार साबित होते है । 
    • खून की कमी न होने के लिए आयरन भरपूर मात्रा में ले ।
    • हरी पत्तेदार सब्जियाँ जरूर खाये ।
    • गुड़ खून बढ़ाने का अच्छा स्तोत्र है इसलिए इसे भी जरूर ले ।
    • तरल पदार्थो का सेवन जरूर करे ताकि शरीर को पानी की कमी न हो ।
    • निम्बू पानी भी जरूर ले ।
    • हल्का व्यायाम जरूर करे ।
    • सीधा लेटने की कोशिश करे ।
    • ओमेगा 3 ओर ओमेगा 6 जरूर लें ।

क्या न खाये :

  • कच्चा मांस ,कच्ची मछली बिल्कुल भी न खाये ।
  • गरम चीजें खाने से बचें ।
  • ड्राई फ्रूट्स अधिक मात्रा में न ले ।
  • बिना डॉक्टर से  पूछे कोई भी दवाई न ले ।
  • तेज़- तेज़ सीढिया न चढ़े ।
  • हील न पहने ।
  • उछल कूद बिल्कुल भी न करे ।
  • भारी सामान न उठाएं ।
  • वज़न कम करने  की कोशिश न करे ।
  • तला -भुना हुआ भोजन न खाएं ।

गर्भावस्था के तीसरे महीने के शारीरिक बदलाव  :

वे कुछ इस प्रकार है :

1. मतली आना: गर्भावस्था के पहले तीन महीनो में बार- बार मतली आना सामान्य है । यह पहली शारीरिक बदलाव होने की निशानी है ।

2. थकावट होनी: ऐसे समय में गर्भवती औरत  बहुत जल्दी थकावट महसूस करती है ।

3. एच सी जी: जब गर्भवती के शरीर में एच सी जी नामक हॉर्मोन पैदा होने लगता है तो उसे बहुत ज़्यादा पेशाब आने की समस्या होने लगती है ।

4. बीपी का ऊपर नीचे होना: ऐसे समय में  बीपी ऊपर नीचे होना स्वभाविक होता है ।

5. स्व्भाव में बदलाव: इस समय गर्भवती का स्व्भाव एकदम बदला हुआ प्रतीत होता है । वह बहुत  चिड़चिड़ी और रुखी हो जाती है ।

6. पेट दर्द या पीठ दर्द: इस समय कभी -कभी पेट दर्द का उठना सामान्य है । इस समय पीठ में दर्द भी शुरु हो जाता है ।

7. पैरो में दर्द या सूजन: पैरो में दर्द या सूजन भी एक आम निशानी है शारीरिक बदलाव की ।

8. बार -बार भूख लगनी: इस वक्त आपको बहुत जल्दी- जल्दी भूख लग सकती है ।

9. जी मचलना: इस समय आपका जी कुछ भी खाने को मचल सकता है ।

10. त्वचा रूखी हो जना: गर्भवती के शरीर के हॉर्मोन्स बदलने की वजह से त्वचा में भी खुश्की और रूखापन आना शुरू हो जाता है ।

11. गंध चढ़नी: आपको किसी भी चीज़ की गंध से परेशानी हो सकती है ।

12. सीने में जलन: गर्भाशय के बढ़ने की वजह से सीने में जलन होना आम बात है ।

13. कबज होना: इस समय कब्ज की समस्या भी हो सकती है ।

क्या आप भी तीसरे महीने की गर्भावस्था में स्पॉटिंग से परेशान है – आईये जानें कारण और उपाय :

क्या है स्पॉटिंग – जब अंडा औरत के गर्भाशय में जगह बनाता है तो २-3 खून की बूँदें आने को स्पॉटिंग कहते है। पर अगर ये ज़्यादा हो तो चिंता का विषय होता है।

कारण  –  

  • जब गर्भवती महिला गर्भ धारण करतीं है तो उसके शरीर में कई तरह के बदलाव आते है। उसके कई प्रकार के होर्मोनेस भी बदलते है  । इस वजह से शुरूआती  दिनों में कई बार २-3 बून्दें खून की आ जाती है । यह पीरियड्स  का हिस्सा नहीं होती यह एक सामान्य लक्षण है ।
  • अगर औरत का भ्रूण कमजोर हो तो भी खून आ सकता है ।
  • अगर भ्रूण की मौत हो जाते तो भी ख़ून आने की सम्भावना होती है ।

स्पोटिंग रोकने के उपाय : वे इस प्रकार है : 

  • सौंफ – इसे पानी में उबाल कर पिए इससे भी स्पॉटिंग को रोकने में मदद मिलती है ।
  • धनिया – धनिए भी स्पॉटिंग रोकने में मददगार हो सकता है ।

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